Monday, November 23, 2009

इस दोस्ती को किसकी नज़र लगी !!

दोस्तों  के साथ हुई सत्य घटना पर :-  

मंदसौर के कॉलेज में पड़ने वाले इन  दो  दोस्तों की बात जब मेरी  दोस्त  अन्विता ने सुनाई तब  मेने  सोचा  क्यूँ ना  इसे  सबको  बताऊकॉलेज  में  पड़ने  वाले  ये  दोस्तों की  यादगार  में  एक  सबक  हे , कभी  दोस्तों को  बुरा  ना  कहना   मेरे  यार .

हामिद और वैभव जिगरी  बचपन  के  यार  , आज  एक  ही  कॉलेज  में  साथ  आते  , जाते ,दिल  की  हर  बात  एक  दुसरे  को  बताते ,यहाँ  तक  की  क्लास  के  लोग  उन्हें  पति  पत्नी  कहकर  भी  चिड़ाते  पर  दोनों  हमेशा  साथ  रहते .

आज  हामिद और वैभव दोनों  का एक्सटर्नल  था  . दोनों नीमच  से  कॉलेज  साथ  में  आते  थे  ,उस  दिन  वो  वैभव की  मोटर-बाईक   से    रहे  थे , एक्सटर्नल  ख़त्म  हुए , अब  घर  जाने  की  बात  थी  लेकिन  वैभव ने  अपनी  गर्लफ्रेंड   और हामिद के  लिए  भी  टिकेट  ले  लिया .

हामिद ने  कहा :- भाई  तू  बाद  में  पिक्चर  दिखा  लेना , अभी  अपन  एक्साम  का पड़  लेते है , लेकीन  क्या  कहे  वैभव के सर  पर  तो  उस  लड़की  का भुत  सवार  था  ( वैसे  वे  एक  दुसरे  को  दिल  से  बहुत  चाहते  भी  थे ). वैभव ने  मना  कर  दिया  और उसे  भी  अपने  साथ  चलने  का कहने  लगा .

आखरी में  झगड़कर  हामिद जैसे -तैसे  धक्का  खाकर  बस  से   घर  पहुंचा  .अबकी  बार  दोनों  ने  बातचीत  बंद  कर  दी  , उनके  ग्रुप  ने  कैंटीन  में  दोस्ती  करने  की  कोशिश  भी  करी ,पर  अब  सभी  लोग  वैभव के  साथ  हो  गए  और मयंक  अकेला  हामिद के  साथ .उस  समय  पूरी  कैंटीन  के  सामने  एक  दुसरे  को  गाली
  देने  लगे . बाद  में  पुरे  ग्रुप  ने  वैभव  को  बात  करने  को  कहा  पर  वैभव बोला :- "ये  जिए  या  मरे  मुझे  इससे  क्या ???"

"कड़वे वचन  तो  बाणों के  सामान  होते   हे " जिन्होंने  उन  दोनों  के  दिलो  में  पलभर  में  गहरे  छेद  कर  दिए थे .

आज  से  दोनों  अलग -अलग  अपनी  मोटर-बाईक से  आने  लगे .उसी  दिन  एक्सटर्नल  देकर  आते  समय  अचानक  वैभव को  हामिद का कॉल आया  क्या  मालूम  उसने  क्यूँ  नै  उठाया  , फिर  3-4 घंटे  बाद  उसके  दोस्तों का कॉल आया ,बाद  में  6-7 बजे  को  जब  वैभव ने  गौरव  का कॉल उठाया  तो  पता  चला , हामिद का  एक्सिडेंट  हो  गया  है  और उसी  जगह  उसका  इंतकाल  हो  गया ,शायद  वो  आखरी कॉल उसने  तुझे  ही  लगाया  था .

वैभव बहुत  रोया दोस्तों ने उसे सांत्वना भी दिया , वो  उसके  घर  भी  गया .लेकिन  शायद  संत  कबीर  ने  सच  ही  कहा  है :-

"पत्ता  टुटा  डारी  से  , ले  गयी  पवन  उराये  !
अबके  बिछरे  कब  मिले , दुर  परि  है  जाये  !! "

में  अपने  दोस्तों से  सिर्फ  यही  कहना  चाहूँगा  की  भले  ही  कुछ  भी  हो  जाए  कभी  भी  अपने  दोस्तों को  तो  क्या  किसी  को  भी  बुरा   मत  बोलना यारो जब  भी  कुछ  बोले  तो  संत  रहीम  का ये  दोहा  जरुर  याद  करना

"वाणी  ऐसी  बोलिए , मन   का  आपा  खोये   !
औरन  को  शीतल  करे ,आपन  ही  शीतल होय !!"


आपका   मित्र   

नयन   जोशी   

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